आधुनिक राजस्थानी साहित्य में नंद भारद्वाज रो नांव घणै माण सूं लियो जावै । आप मूळ रूप में आलोचना नै आधार देवणिया राजस्थानी-1 रै बगत सूं लिखण वाळा कवि-कथाकर है । हरावळ रै संपादन सूं जुड़िया नंद भारद्वाज री पोथी "दौर अर दायरौ" आलोचना रै सीगै सदियां तांई याद करी जावैला ।
अल्बेयर कामू रै उपन्यास ‘ल स्ट्रैंजर‘ रो राजस्थानी में अनुवाद बैतियाण प्रकासित । आप राजस्थानी नै आलोचना अर कविता री भाषा दीवी अर "सांम्ही खुलतो मारग" उपन्यास रै मारफत राजस्थान रै जन-जीवण अर लोक जीवन नै जिण ढाळै राखियो है उण सूं पैला किणी इण ढाळै राजस्थानी मांय प्रयास नीं हुयो । आपनै इणी पोथी माथै साहित्य अकादेमी रो पुरस्कार ई मिल्यो । आं दिनां आपरो "बदळती सरगम" कहाणी संग्रै घणो चरचा में है । राजस्थानी री चावी ठावी पत्रिका "राजस्थली" (संपादक- श्याम महर्षि अर रवि पुरोहित) श्री डूंगरगढ़ रै आलोचना अंक मांय छप्यो आलोख जिण मांय नंद भारद्वाज रै उपन्यास नै आपरी परंपरा में जांचण-परखण री एक कोसिस अठै आपरी निजर करूं । आप पाठकां री राय मिल्यां आगै रो मारग मिलैला ।
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आप ओ आलेख
राजस्थाली रै ब्लॉग माथै ई देख सको ।
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साहित्य अकादेमी पुरस्कार, 2004 |
साहित्य अकादमी पुरस्कार रै मौकै नंद भारद्वाज रौ बयान अर कीं कवितावां बांचण खातर लिंक
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"सांम्ही खुलतो मारग" रो हिंदी अनुवाद आगे खुलता रास्ता रो लोकार्पण |
नंद भारद्वाज रो ब्लॉग -
हथाई
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