Sunday, September 13, 2015

होते हुए प्रेम में खलल के दस्तखत : उचटी हुई नींद


डॉ.नीरज दइया को पढऩा इस मायनों में सुकून भरा होता है कि वे आदतन ही प्रचलित मानकों को ध्वस्त करते हुए आगे बढ़ते हैं और कुछ ऐसा निकाल कर सामने रखते हैं, जो उपेक्षित रहा, अब तक नजरअंदाज किया गया हो। वे किसी को भी सिर्फ इसलिए नहीं मानते कि उनकी अग्रज पीढिय़ों ने गुणगान किया है। किसी को मानने के लिए उनके पास अपने कुछ औजार हैं। उनका अपना लोक है। अग्रज पीढ़ी की हदों को नापने की भी एक अनोखी दृष्टि है और कुछ नया करने के लिए समुचित मेहनत करने की ललक भी। इसीलिए कहा भी जाता है कि नीरज दइया का साहित्यिक-चरित्र है ही ऐसा जो उन्हें अचानक से विवादों के बीच खड़ा कर देता है। इसे बहुत ही सकारात्मक तरीके से समझा जाए तो यह कि उनके लिखे हुए को पढऩा तयशुदा फार्मेट से उबरना है, कुछ नया पाना है।

'उचटी हुई नींद' की कविताएं इससे भिन्न नहीं हैं। इस काव्य संग्रह के माध्यम से वे हिंदी में कविताएं लिखते हैं तो यह उनके प्रचलित स्वरूप से भी भिन्न है। राजस्थानी में ही लिखने वाले नीरज दइया का हिंदी कवि रूप इसमें मिलता है तो दूसरी ओर इस बार यहां नीरज दइया आलोचक नहीं है, प्रेम में पगे हैं। हालांकि कहीं-कहीं वे यहां भी कविता क्या होती है के सवाल से मुठभेड़ करते हुए अपने पाठक को यह भी सिखाने की कोशिश करते हैं कि कविता अमुक जगह होती है लेकिन फिर भी यहां नीरज दइया जितने प्रेमिल हैं, पहले नहीं दिखे और इस वजह से यह संग्रह खास बन जाता है।
प्रेम को उन्होंने बहुत सारे फ्रेम दिए हैं और प्रतीकों के माध्यम से उन हादसों पर भी संकेत किया है जो माने तो प्रेम गए लेकिन वास्तव में प्रेम से मिलते-जुलते सहानुभूति, दया इत्यादि थे। यहां कवि का संकेत बहुत ही गहरा है कि प्रेम का रिप्लेसमेंट सिर्फ प्रेम ही है, इसकी आड़ में जितनी बार भी दूसरी चीजें आएंगी समय के साथ खारिज होती जाएंगी, प्रेम के खांचे में सिर्फ प्रेम ही टिक पाएगा।
और वे जब कहते हैं, 'घटित होता है/ जब-जब प्रेम/पुराना कुछ भी नहीं होता/हर बार होता है नया/'
या के
'प्रेम के बिना नहीं खिलते फूल/कुछ भी नहीं खिलता बिना प्रेम के।'
तब प्रेम को समझने से अधिक समझाने की कोशिश करते हैं। प्रेम पर एक नए तरीके से नजर फेंकते से नजर आते हैं। वे पूरे संग्रह में प्रेम बहुत कम करते हैं। या तो प्रेम को परिभाषित करते हैं और प्रेम और अप्रेम के बीच भेदों को उजागर करते हैं या होते हुए प्रेम के दृश्य रचते हैं। नीरज दइया का प्रेम को समझने-समझाने का यह सलीका इन्हें प्रेम कवि के रूप में स्थापित तो करता है लेकिन प्रेमी नहीं, बहुत अधिक गहरे देखें तो वे प्रेक्षक हैं। उचटी हुई नींद के शीर्षक की तरह यह कविताएं भी उनकी प्रेम और प्रेम के बीच आने वाले दखल का परिणाम है।
नींद के उचट जाने के बाद होने वाली बेचैनी की बानगी है। वापस नींद नहीं आने तक नींद उड़ाने वालों के नाम जारी किए गए उलाहने हैं। यीधे-सीधे कहूं तो

ये कविताएं होते हुए प्रेम में पड़े खलल के दस्तखत हैं, एक दस्तखत देखिये, 'कभी कुछ लिखा/ कभी कुछ/ जो भी लिखा/ समय का सत्य था/ मैं था वहां/ तुम थी वहां...'
और इसी तरह गीत-2 में वे कहते हैं।
जो बात/ आज तक कही नहीं/ किसी संकोच के रहते/ रहा होगा कोई डर/ बात वही/ कह रही हो आज तुम/ दोस्तों के बीच/ गुनगुनाते हुए गीत/ बात यही/ बहुत पहले/ सुन चुका मैं/ अब भी डरता हूं मैं/ मैंने कभी प्रेम-गीत गाया नहीं।
और प्रेम का समय शीर्षक कविता में
'जब मैंने किया प्रेम/ वह समय नहीं था/ वह प्रेम था समय से पहले।'
ऐसी बहुत सारी कविताओं के माध्यम से प्रेम के इर्दगिर्द वे खूब सारे रंग रचते हैं और प्रेम को और अधिक खोलते जाते हैं, पारदर्शी बनाने की हद तक खोल देते हैं।
प्रचलित मान्यताओं के चौखटों को तोडऩे वाले गोताखोर नीरज दइया के लिए कविता रूपी औजार नया नहीं है लेकिन वे वस्तुत: गद्य के नजदीक रहे हैं और इस कृति के प्रेम कवि नीरज दइया का यह गद्य-प्रेम इन्हें आखिरी तक आते-आते कविता के खाते में आलेख जोडऩे का नवाचारी बना देते हैं। जो लोग नीरज दइया को जानते हैं, वे अंतिम की तीन आलेख टाइप कविता (गद्य-कविता) पूर्वज, पापड़ और विवश को पढ़ते वक्त इसे उनके किसी अगले सीक्वल की आहट बता सकते हैं। लंबी कविता के कई प्रयोग कर चुके नीरज दइया क्या अपनी उचटी हुई नींद का उपयोग इस तरह की गद्य-कविताओं के रूप में भी करेंगे?

यह सवाल उन्हीं के लिए छोड़ा जाना चाहिए। क्योंकि जब वे 'पिता' कविता में कोटगेट पर कविता लिखने नहीं लिखने का सवाल उठाते हैं तो कोई बड़ी बात नहीं है कि इन तीन आलेखों को शामिल ही सवाल उठाने के लिए किया हो। लेकिन इन सभी से अलग नीरज दइया की इन कविताओं से निकलते हुए उनके कभी प्रेमिल रहे होने की जो खबर हाईलाइट होती है, वह उनकी बहुत सारी प्रचलित छवियों को तोड़ती है, नये सिरे से सोचने के लिए मजबूर करती है।

डा.नीरज दइया जब आलोचना करते हैं तो भले ही उनके पास इतनी मजबूत लॉबी नहीं हो जो उनके लिखे हुए को चर्चा में में लाए लेकिन इन सभी से विचलित हुए बगैर वे पूरी जिम्मेदारी से लिखते हैं, शायद यह सोचकर कि समय की सतह पर जब कभी नीर-क्षीर का युग आएगा, उनके लिखे हुए को भी समझा जाएगा। ठीक उसी तरह, उनकी प्रेम कविताओं का यह संग्रह भी समय से अपने लिए एक दृष्टि की मांग तो करता ही है। मैं कामना करता हूं कि जिस स्तर पर जाकर डॉ.दइया ने प्रेम को समझा है, उसी स्तर के पाठक भी उन्हें मिले। शुभकामनाएं।

- हरीश बी. शर्मा

0 टिप्पणियाँ:

Post a Comment

डॉ. नीरज दइया की प्रकाशित पुस्तकें :

हिंदी में-

कविता संग्रह : उचटी हुई नींद (2013), रक्त में घुली हुई भाषा (चयन और भाषांतरण- डॉ. मदन गोपाल लढ़ा) 2020
साक्षात्कर : सृजन-संवाद (2020)
व्यंग्य संग्रह : पंच काका के जेबी बच्चे (2017), टांय-टांय फिस्स (2017)
आलोचना पुस्तकें : बुलाकी शर्मा के सृजन-सरोकार (2017), मधु आचार्य ‘आशावादी’ के सृजन-सरोकार (2017), कागद की कविताई (2018), राजस्थानी साहित्य का समकाल (2020)
संपादित पुस्तकें : आधुनिक लघुकथाएं, राजस्थानी कहानी का वर्तमान, 101 राजस्थानी कहानियां, नन्द जी से हथाई (साक्षात्कार)
अनूदित पुस्तकें : मोहन आलोक का कविता संग्रह ग-गीत और मधु आचार्य ‘आशावादी’ का उपन्यास, रेत में नहाया है मन (राजस्थानी के 51 कवियों की चयनित कविताओं का अनुवाद)
शोध-ग्रंथ : निर्मल वर्मा के कथा साहित्य में आधुनिकता बोध
अंग्रेजी में : Language Fused In Blood (Dr. Neeraj Daiya) Translated by Rajni Chhabra 2018

राजस्थानी में-

कविता संग्रह : साख (1997), देसूंटो (2000), पाछो कुण आसी (2015)
आलोचना पुस्तकें : आलोचना रै आंगणै(2011) , बिना हासलपाई (2014), आंगळी-सीध (2020)
लघुकथा संग्रह : भोर सूं आथण तांई (1989)
बालकथा संग्रह : जादू रो पेन (2012)
संपादित पुस्तकें : मंडाण (51 युवा कवियों की कविताएं), मोहन आलोक री कहाणियां, कन्हैयालाल भाटी री कहाणियां, देवकिशन राजपुरोहित री टाळवीं कहाणियां
अनूदित पुस्तकें : निर्मल वर्मा और ओम गोस्वामी के कहानी संग्रह ; भोलाभाई पटेल का यात्रा-वृतांत ; अमृता प्रीतम का कविता संग्रह ; नंदकिशोर आचार्य, सुधीर सक्सेना और संजीव कुमार की चयनित कविताओं का संचयन-अनुवाद और ‘सबद नाद’ (भारतीय भाषाओं की कविताओं का संग्रह)

नेगचार 48

नेगचार 48
संपादक - नीरज दइया

स्मृति में यह संचयन "नेगचार"

स्मृति में यह संचयन "नेगचार"
श्री सांवर दइया; 10 अक्टूबर,1948 - 30 जुलाई,1992

डॉ. नीरज दइया (1968)
© Dr. Neeraj Daiya. Powered by Blogger.

आंगळी-सीध

आलोचना रै आंगणै

Labels

101 राजस्थानी कहानियां 2011 2020 JIPL 2021 अकादमी पुरस्कार अगनसिनान अंग्रेजी अनुवाद अतिथि संपादक अतुल कनक अनिरुद्ध उमट अनुवाद अनुवाद पुरस्कार अनुश्री राठौड़ अन्नाराम सुदामा अपरंच अब्दुल वहीद 'कमल' अम्बिकादत्त अरविन्द सिंह आशिया अर्जुनदेव चारण आईदान सिंह भाटी आईदानसिंह भाटी आकाशवाणी बीकानेर आत्मकथ्य आपणी भाषा आलेख आलोचना आलोचना रै आंगणै उचटी हुई नींद उचटी हुई नींद. नीरज दइया उड़िया लघुकथा उपन्यास ऊंडै अंधारै कठैई ओम एक्सप्रेस ओम पुरोहित 'कागद' ओळूं री अंवेर कथारंग कन्हैयालाल भाटी कन्हैयालाल भाटी कहाणियां कविता कविता कोश योगदानकर्ता सम्मान 2011 कविता पोस्टर कविता महोत्सव कविता-पाठ कविताएं कहाणी-जातरा कहाणीकार कहानी काव्य-पाठ किताब भेंट कुँअर रवीन्द्र कुंदन माली कुंवर रवीन्द्र कृति ओर कृति-भेंट खारा पानी गणतंत्रता दिवस गद्य कविता गली हसनपुरा गवाड़ गोपाल राजगोपाल घिर घिर चेतै आवूंला म्हैं घोषणा चित्र चीनी कहाणी चेखव की बंदूक छगनलाल व्यास जागती जोत जादू रो पेन जितेन्द्र निर्मोही जै जै राजस्थान डा. नीरज दइया डायरी डेली न्यूज डॉ. अजय जोशी डॉ. तैस्सितोरी जयंती डॉ. नीरज दइया डॉ. राजेश व्यास डॉ. लालित्य ललित डॉ. संजीव कुमार तहलका तेजसिंह जोधा तैस्सीतोरी अवार्ड 2015 थार-सप्तक दिल्ली दिवाली दीनदयाल शर्मा दुनिया इन दिनों दुलाराम सहारण दुलाराम सारण दुष्यंत जोशी दूरदर्शन दूरदर्शन जयपुर देवकिशन राजपुरोहित देवदास रांकावत देशनोक करणी मंदिर दैनिक भास्कर दैनिक हाईलाईन सूरतगढ़ नगर निगम बीकानेर नगर विरासत सम्मान नंद भारद्वाज नन्‍द भारद्वाज नमामीशंकर आचार्य नवनीत पाण्डे नवलेखन नागराज शर्मा नानूराम संस्कर्ता निर्मल वर्मा निवेदिता भावसार निशांत नीरज दइया नेगचार नेगचार पत्रिका पठक पीठ पत्र वाचन पत्र-वाचन पत्रकारिता पुरस्कार पद्मजा शर्मा परख पाछो कुण आसी पाठक पीठ पारस अरोड़ा पुण्यतिथि पुरस्कार पुस्तक समीक्षा पुस्तक-समीक्षा पूरन सरमा पूर्ण शर्मा ‘पूरण’ पोथी परख प्रज्ञालय संस्थान प्रमोद कुमार शर्मा फोटो फ्लैप मैटर बंतळ बलाकी शर्मा बसंती पंवार बातचीत बाल कहानी बाल साहित्य बाल साहित्य पुरस्कार बाल साहित्य समीक्षा बाल साहित्य सम्मेलन बिणजारो बिना हासलपाई बीकानेर अंक बीकानेर उत्सव बीकानेर कला एवं साहित्य उत्सव बुलाकी शर्मा बुलाकीदास "बावरा" भंवरलाल ‘भ्रमर’ भवानीशंकर व्यास ‘विनोद’ भारत स्काउट व गाइड भारतीय कविता प्रसंग भाषण भूमिका मंगत बादल मंडाण मदन गोपाल लढ़ा मदन सैनी मधु आचार्य मधु आचार्य ‘आशावादी’ मनोज कुमार स्वामी मराठी में कविताएं महेन्द्र खड़गावत माणक माणक : जून मीठेस निरमोही मुकेश पोपली मुक्ति मुक्ति संस्था मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’ मुलाकात मोनिका गौड़ मोहन आलोक मौन से बतकही युगपक्ष युवा कविता रक्त में घुली हुई भाषा रजनी छाबड़ा रजनी मोरवाल रतन जांगिड़ रमेसर गोदारा रवि पुरोहित रवींद्र कुमार यादव राज हीरामन राजकोट राजस्थली राजस्थान पत्रिका राजस्थान सम्राट राजस्थानी राजस्थानी अकादमी बीकनेर राजस्थानी कविता राजस्थानी कविता में लोक राजस्थानी कविताएं राजस्थानी कवितावां राजस्थानी कहाणी राजस्थानी कहानी राजस्थानी भाषा राजस्थानी भाषा का सवाल राजस्थानी युवा लेखक संघ राजस्थानी साहित्यकार राजेंद्र जोशी राजेन्द्र जोशी राजेन्द्र शर्मा रामपालसिंह राजपुरोहित रीना मेनारिया रेत में नहाया है मन लघुकथा लघुकथा-पाठ लालित्य ललित लोक विरासत लोकार्पण लोकार्पण समारोह विचार-विमर्श विजय शंकर आचार्य वेद व्यास व्यंग्य व्यंग्य-यात्रा शंकरसिंह राजपुरोहित शतदल शिक्षक दिवस प्रकाशन श्याम जांगिड़ श्रद्धांजलि-सभा श्रीलाल नथमल जोशी श्रीलाल नथमलजी जोशी संजय पुरोहित संजू श्रीमाली सतीश छिम्पा संतोष अलेक्स संतोष चौधरी सत्यदेव सवितेंद्र सत्यनारायण सत्यनारायण सोनी समाचार समापन समारोह सम्मान सम्मान-पुरस्कार सम्मान-समारोह सरदार अली पडि़हार संवाद सवालों में जिंदगी साक्षात्कार साख अर सीख सांझी विरासत सावण बीकानेर सांवर दइया सांवर दइया जयंति सांवर दइया जयंती सांवर दइया पुण्यतिथि सांवर दैया साहित्य अकादेमी साहित्य अकादेमी पुरस्कार साहित्य सम्मान सीताराम महर्षि सुधीर सक्सेना सूरतगढ़ सृजन कुंज सृजन संवाद सृजन साक्षात्कार हम लोग हरदर्शन सहगल हरिचरण अहरवाल हरीश बी. शर्मा हिंदी अनुवाद हिंदी कविताएं हिंदी कार्यशाला होकर भी नहीं है जो