
राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर के "सांवर दइया पैली पोथी पुरस्कार" वर्ष 1996-97 के लिए पुरस्कृत कवि सरदार अली पडि़हार को "मूंडै बोलै रेतड़ली" में 3322 ली छन्द के रचयिता की शानदार प्रस्तुति और समग्र सृजन के लिए रविवार 28 जून, 2015 को मुक्ति एवं सांझी विरासत द्वारा "नगर विरासत सम्मान" अर्पित किया गया। इस अवसर पर मुझे स्वागत भाषण देने का दायित्व दिया गया। श्री सरदार अली जी से मेरी अंतरंगता मूंडै बोलै रेतड़ली के प्रकाशन के समय से निरंतर रही है और राजस्थान शिक्षा विभाग में रहते हुए मुझ पर गुरुजी का खूब आशीर्वाद रहा। नगर विरासत सम्मान पर हार्दिक मंगलकामनाएं।
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